आपका चार्ट साफ बोलता है — आपकी कुंडली में सातवें भाव में शनि-केतु की युति है। यह रिश्तों में कर्मिक बोझ और देरी लाती है। अशीष की कुंडली में शुक्र-शनि की युति (कुंभ राशि, तीसरे भाव में) उनकी वैवाहिक ज़िंदगी में भावनात्मक शीतलता और दूरी की ओर इशारा करती है। उनका बुध वक्री है — वे अपने मन की बात स्पष्ट नहीं कर पाते, खुद भी उलझन में रहते हैं। सातवें भाव का स्वामी गुरु (तुला, 11वें भाव में) है, जो दर्शाता है कि उनकी शादी टूटेगी नहीं, मित्रता का आधार है — लेकिन प्रेम और आत्मीयता की कमी है। राहु 12वें भाव में है, जो मानसिक भटकाव और छिपे हुए आकर्षण दिखाता है। उनके मन में आपके प्रति आकर्षण है, लेकिन शनि की मजबूत पकड़ उन्हें खुलकर आगे नहीं बढ़ने देती। वे अंदर से द्वंद्व में हैं — एक ओर जिम्मेदारी, दूसरी ओर अधूरी भावनाएँ। यह कोई सरल स्थिति नहीं है।
आपका चार्ट साफ बोलता है — आपकी कुंडली में सातवें भाव में शनि-केतु की युति है। यह रिश्तों में कर्मिक बोझ और देरी लाती है। अशीष की कुंडली में शुक्र-शनि की युति (कुंभ राशि, तीसरे भाव में) उनकी वैवाहिक ज़िंदगी में भावनात्मक शीतलता और दूरी की ओर इशारा करती है। उनका बुध वक्री है — वे अपने मन की बात स्पष्ट नहीं कर पाते, खुद भी उलझन में रहते हैं। सातवें भाव का स्वामी गुरु (तुला, 11वें भाव में) है, जो दर्शाता है कि उनकी शादी टूटेगी नहीं, मित्रता का आधार है — लेकिन प्रेम और आत्मीयता की कमी है। राहु 12वें भाव में है, जो मानसिक भटकाव और छिपे हुए आकर्षण दिखाता है। उनके मन में आपके प्रति आकर्षण है, लेकिन शनि की मजबूत पकड़ उन्हें खुलकर आगे नहीं बढ़ने देती। वे अंदर से द्वंद्व में हैं — एक ओर जिम्मेदारी, दूसरी ओर अधूरी भावनाएँ। यह कोई सरल स्थिति नहीं है।
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